श्री सवाभगत की जगह - पीपलीधाम में आपका स्वागत है
श्री रामदेवपीर पीठ - पीपलीधाम
श्री रामदेवपीर पीठ, पीपलीधाम
विक्रम संवत 2054 के चैत्र वद चतुर्थी, पंचमी एवं षष्ठी — अर्थात गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार, जो 16, 17 और 18 अप्रैल 1998 के अनुरूप थे, इन शुभ तिथियों को मंदिर के पावन धार्मिक कार्यक्रमों के लिए निर्धारित किया गया था।
इसी आयोजन के अंतर्गत चैत्र वद पंचमी, दिनांक 17 अप्रैल 1998 (17-04-1998) को भगवान की मूर्ति की वैदिक विधि से प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न की गई। यह पावन अवसर मंदिर के इतिहास का एक गौरवशाली अध्याय बना और आज भी यह दिवस श्रद्धालुओं के लिए आस्था, भक्ति एवं आध्यात्मिक प्रेरणा का प्रतीक माना जाता है।
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पीपली के पीर बाबा रामदेव
अजमलराय के आजीजी भरे शब्द सुनते ही द्वारकाधीश ने उन्हें धीरज देकर वचन देते हुए कहा कि, 'जाओ, तुम्हारे यहाँ एक वर्ष बाद पुत्र जन्म होगा। उसका नाम तुम वड़ा वीरमदे रखना। बस इतना याद रखना...'
यह बात सुनते ही दिए गए वचन के शब्दों पर उन्हें तुरंत विचार आया। राजा हो तो बुद्धि का पराक्रम भी हो। उन्होंने 'वड़ा वीरमदे' इस शब्द का विचार किया। उन्हें लगा कि यदि वड़ा तो छोटा कौन? उन्होंने अपनी उलझन और शंका दूर करने के लिए तुरंत ही द्वारकाधीश से कहा, 'प्रभु, वड़ा वीरमदे तो छोटा कौन?' इस पर द्वारकाधीश ने दूसरा वचन देते हुए कहा कि, 'जब वड़ा वीरमदे सवा महीने के होंगे तब मैं स्वयं अपनी इच्छा से वहाँ पधारूँगा और पालने में पौढ़ूँगा। उसकी निशानी के रूप में उस कमरे में कुंकुम के कुम-कुम पगलिए पड़ेंगे। यदि कुंकुम पगलिए दिखें तो मानना कि स्वयं द्वारकाधीश ही पधारे हैं। तुम मेरा नाम रामदे रखना...'
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प.पू. ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु श्री सवाराम साहब
हंसदास साहब मिलने के बाद इसी ही साल में रणुजा के राय श्री रामदेवजी महाराज भी श्री सवाराम बापा को आके मिले । एक रात श्री रामदेवजी महाराज श्री सवाराम साहब के घर पर पधारे और उनको बचन देते हुए कहा कि, ‘‘सवा, मुझे तेरे यहां हंमेश के लिए बैठना है। यहां अखंड सदाव्रत शुरुहोगा और घोडा आएगा । फिर यहां इशान कोने में मेरा बावन गज का ध्वज ( नेजा ) लहेरायेगा ऐसा मेरा बचन है ।
श्री सवाराम साहब की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी । इसलिए उन्होंने श्री रामदेवजी महाराज को कहा कि, ‘‘मैं ध्वज कहाँ लहेराउँ ? मुझसे तो ये हो नहीं सकता । फिर भी आपकी आज्ञा हो तो यहाँ घर पर एक नीम का पेड है तो उस पर लहेराउँ ।’’
ये बात सुनकर श्री रामदेवजी महाराजने कहा कि, ‘‘तुम चिंता फिकर मत करो । तेरी शक्ति हो या न हो फिर भी मुझे तेरे यहाँ बैठना है । हमारा पुराना कोई नजदीकी ( नीजी ) नाता है इसलिए ये अनुकूल हुआ है । आगे जाके समय आने पर जिस पुरुष के हाथों जो बननेवाला है वो बनकर रहेगा ।’’
श्री सवाराम साहबने उत्तर दिया कि ‘‘जैसी आपकी ईच्छा ।’’
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प.पू. ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज
चेतन ब्रह्म रणुजा के राय पीर रामदेवजी महाराजने श्री सवाराम साहब को बचन देते हुए ऐसे शब्द का उच्चार किया था कि, ‘‘आगे समय सानुकूल बनते ही अनायासे जिस पुरुष के हाथो जो बननेवाला है वो बनेगा ।’’
ये शब्द यहाँ भावि में प्रगट होनेवाले महापुरुष का संकेत करते है । श्री सवाराम साहबने नागदेव की शान से खुदने व्यवसाय छोड दीया था मगर उनके सुपुत्र श्री हरजीवनदास और उनकी धर्मपत्नी श्री जीवतीबाई ( जीवुमा ) अपने व्यवसाय में मुसीबते झेलकर भी घर का गुजारा करने के अलावा यहाँ पधारते हुए साधु संत की सेवा भी करते थे और सदाव्रत की कार्यवाही को भी नीभाते थे ।
ऐसे भक्त और भक्ति के घर प्रजापति कुल में ( ज्ञाति में ) श्री हरजीवनदास को निमित्त बनाकर उनके घर वि.सं. १९९० ( इसवीसन १९३४ ) ज्येष्ठ सुद १५ रविवार के दिन श्री बलदेवदास महाराज का प्रागट्य हुआ । अलौकिक शक्तिवाले निझारी पुरुष का प्रादुर्भाव हुआ । जिस तरह कीचड में कमल खीलता है उसी तरह पीपली जैसे गाँव में उनको धर्मभूमि बनाने और श्री रामदेव पीर का पावन धाम बनाने के लिए उनका आगमन हुआ ।
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प.पू. श्री श्री अनंत विभूषित जगद्गुरु श्री रामदेवाचार्य भक्तराज श्री वासुदेव महाराज गुरु श्री बलदेवदास महाराज
भक्त वत्सल, दया, दातारी, सत्य, प्रेम करुणा के सागर, स्नेहमूर्ति, भजन के उपासक ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु श्री सवाराम बापा के भजन भोजन के आशीर्वाद से और सहजमूर्ति भक्तराज श्री बलदेवदास महाराज की अहेतुक कृपा से श्री रामदेवपीर मंदिर श्री सवाभगत की जगह पीपलीधाम के वर्तमान गादीपति परम पूज्य भक्तराज श्री वासुदेव महाराज को विक्रम संवत २०८२ भादरवा सुद-दशम सोमवार, तारीख २१-०९-२०२६ के दिन शाम ५.१५ बजे संपूर्ण भारतवर्ष के आचार्यश्री एवं जगतगुरु श्री रामानंदाचार्य तथा श्री वैष्णव संप्रदाय के तीनों अनी अखाड़ों के श्री महंतों-महामंडलेश्वर, साधु-संतों, महंतों, कथाकारश्री, कला के उपासकों, समाजसेवकों, राजनीतिक अग्रणियों, संपूर्ण सेवक समुदाय की उपस्थिति में
पावन प.पू. भक्तराज श्री वासुदेव महाराज को उनकी समाज सेवा, भजन, भोजनभाव और सेवक समुदाय के राष्ट्रप्रेम, गौ-माता के प्रेम, साधु-संतों की सेवा के दर्शन करते हुए प.पू. भक्तराज श्री वासुदेव महाराज को श्री रामदेवपीर पीठ के जगतगुरु रामदेवाचार्य पद पर विराजमान किया गया है।
श्री परमपूज्य भक्तराज श्री वासुदेव महाराज को श्री रामदेवपीर पीठ पीपलीधाम के श्री श्री अनंत विभूषित जगतगुरु श्री रामदेवाचार्य भक्तराज श्री वासुदेव महाराज गुरु श्री बलदेवदास महाराज के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है।
पीपलीधाम की ऐतिहासिक सूची
श्री सवाराम साहेब – श्री रामदेवपीर पीठ – पीपलीधाम
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श्री सवाराम साहब का प्रागट्य
वि.सं. १९१७, माघ सुदी-१५
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गुरु श्री स्वामी फूलगरजी के साथ मिलन
वि.सं. १९५६
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श्री हंसदास साहब का मिलाप
वि.सं. १९६८
पीपलीधाम की गादी परंपरा
श्री सवाराम साहेब से लेकर आज तक, पीपलीधाम की पवित्र गादी परंपरा संतों के दिव्य मार्गदर्शन में निरंतर चली आ रही है। इस अखंड परंपरा ने धाम की सेवा, पूजा एवं आध्यात्मिक विरासत को सदैव सुरक्षित और जीवंत बनाए रखा है।
प.पू. ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु श्री सवाराम साहब
प.पू. ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज
प.पू. श्री श्री अनंत विभूषित जगद्गुरु श्री रामदेवाचार्य भक्तराज श्री वासुदेव महाराज गुरु श्री बलदेवदास महाराज
आगामी उत्सव
दर्शनीय स्थल
श्री रामदेवजी महाराज का विसामा
वि.सं. १९७४ में ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु श्री सवाराम साहेब रासमंडल लेकर बजाणा गाँव जा रहे थे, तब इस जगह अचानक पालकी में से श्रीफल नीचे गिरकर फूट गया। यहाँ ब्रह्मनिष्…
श्री बलदेवदास महाराज गौशाला
सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज के करकमलों से श्री रामदेव पीर के विसामे में गौशाला का निर्माण हुआ है। सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज के देहविलय के बाद उनके ज्येष्ठ प…
रामा सरोवर
श्री रामदेव पीर के विसामे के स्थान पर सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज द्वारा रामा सरोवर का प्रारंभिक निर्माण हुआ। तत्पश्चात भक्तराज श्री वासुदेव महाराज द्वारा इस स…
भजन संतवाणी
पीपलीधाम में आयोजित भजन संतवाणी और श्री वासुदेव महाराज के सत्संग यहाँ देखें।
दर्शन एवं आरती का समय
मंगला आरती
7:00 AM – 7:30 AM
मंदिर दर्शन
मंदिर दर्शन के लिए 24 घंटे खुला है।
संध्या आरती
7:00 PM – 7:30 PMश्री रामदेवपीर पीठ – पीपलीधाम
पीपली, गुजरात – ३८२७४५
संत श्री सवाराम बापा (सवा भगत) की पावन जगह एवं श्री रामदेवपीर बापा के पवित्र पीपलीधाम में दर्शन हेतु पधारें। गूगल मैप्स के माध्यम से सीधे मार्गदर्शन के साथ अपनी यात्रा को सरल बनाएं।