प्रागट्य और दिव्य संकेत
मातुश्री जीवुमा पिताश्री हरजीवनदास । बलदेव सद्गुरु सवारामना चरणकमलनो दास ॥
चेतन ब्रह्म रणुजा के राय पीर रामदेवजी महाराजने श्री सवाराम साहब को बचन देते हुए ऐसे शब्द का उच्चार किया था कि, ‘‘आगे समय सानुकूल बनते ही अनायासे जिस पुरुष के हाथो जो बननेवाला है वो बनेगा ।’’
ये शब्द यहाँ भावि में प्रगट होनेवाले महापुरुष का संकेत करते है । श्री सवाराम साहबने नागदेव की शान से खुदने व्यवसाय छोड दीया था मगर उनके सुपुत्र श्री हरजीवनदास और उनकी धर्मपत्नी श्री जीवतीबाई ( जीवुमा ) अपने व्यवसाय में मुसीबते झेलकर भी घर का गुजारा करने के अलावा यहाँ पधारते हुए साधु संत की सेवा भी करते थे और सदाव्रत की कार्यवाही को भी नीभाते थे ।
ऐसे भक्त और भक्ति के घर प्रजापति कुल में ( ज्ञाति में ) श्री हरजीवनदास को निमित्त बनाकर उनके घर वि.सं. १९९० ( इसवीसन १९३४ ) ज्येष्ठ सुद १५ रविवार के दिन श्री बलदेवदास महाराज का प्रागट्य हुआ । अलौकिक शक्तिवाले निझारी पुरुष का प्रादुर्भाव हुआ । जिस तरह कीचड में कमल खीलता है उसी तरह पीपली जैसे गाँव में उनको धर्मभूमि बनाने और श्री रामदेव पीर का पावन धाम बनाने के लिए उनका आगमन हुआ । उनके बारे में संतपुरुषोने जो दिव्य शब्द का संकेत दिया है और श्री बलदेवदास महाराज की जो चेष्ठा, जो कार्य है उनसे ये सत्य की प्रतीति होती है ।
उन्होंने प्रागट्य के समय पयपान शुरु नहीं किया था । सब चिंतीत हो गए । उसी समय श्री सवाराम साहबने उनके शीर पर अपना हाथ रखकर जो शब्द निकाले, जिस शब्द का प्रयोग किया वो बहोत गर्भित और शानयुक्त है । उन्होंने कहा कि, ‘‘भाई, ऐसा नहीं चल सकता । शरीर को धारण करके आप इस संसार में आये है तो आपको इस शरीर के अनुकूल होना ही चाहिए । आपको पसंद हो या न हो, आपकी ईच्छा हो या न हो फिर भी मानव सहज चेष्ठा को धारण करनी पडती है । उसको अपनानी पडती है ।’’
इन शब्दो का मर्म अपनाते हुए उन्होंने मानव सहज चेष्ठा को धारण कर ली और पयपान शुरु कर दिया । श्रीराम, श्रीकृष्ण, श्री रामदेव पीर ये सब अवतारी पुरुषोने भी मानवसहज चेष्ठा और मर्यादा का स्वीकार करके अपना कार्य कीया है । श्री सवाराम साहब के ये शब्द यहाँ प्रगट हुए महापुरुष की झांकी कराता है ।
इसके अलावा गिरनार के २५० साल की उम्र के सिध्धपुरुष श्री शांतिगीरी महाराजने भी बाल स्वरूपी श्री बलदेवदास महाराज के शीर पर श्री सवाराम साहब का हाथ रखवाया था और बाद में उन्होंने अपना हाथ रखा था । उस समय श्री शांतिगीरी महाराजने श्री सवाराम साहब को कहा कि, ‘‘आपने अब इस बालक के शीर पर अपना हाथ रखा है तो गुरु महाराज के प्रताप से ये महान पराक्रमी और सिध्धपुरुष होगा और सारी विश्व में उसका डंका बज जाएगा ।’’ उनके इन शब्दो का प्रभाव अब समय आने पर सच्चा साबित हो रहा है ।
इसी तरह ध्रांगध्रा शहर के काशी विश्वनाथ मंदिर के महापुरुष श्री नारायण स्वामी के शब्द भी सूचक है । श्री बलदेवदास महाराज के प्रागट्य का संदेश देने के लिए उनके पिता श्री हरजीवनदास श्री नारायण स्वामी के पास गये थे । इस शुभ संदेश सुनकर श्री नारायण स्वामीने आगमवाणी जैसे शब्द का प्रयोग करते हुए कहा कि, ‘‘मैं वो बात जानता हूँ । तेरे घर जो लडका है वो राजतीलक है । ये बात याद रखना । मुझे वो पता है । उसने बहोत योग किया है और राज भुगत कर आया है । आगे देखना क्या होता है । वो सारी दुनिया में नाम कमायेगा । उनका नामप्रकाश चारों ओर फैल जाएगा । मगर ये बात अभी किसीको बताना मत । समय आने पर सबको मालूम हो जायेगा ।’’ इस तरह इनके ये शब्द भी अवतारी पुरुष का निर्देश करते है ।
उनके अवतारी पुरुष होने का एक ओर प्रमाण मिलता है । उनकी जन्म कुंडली बनाते समय ध्रांगध्रा के विद्वान ज्योतिषी कालु महाराजने श्री हरजीवनदास को अचंबित होते हुए कहा कि, ‘‘ये बालक कोई अवतारी पुरुष हो ऐसा लगता है । ये महान बनेगा । समय आने पर इसकी महानता प्रगट होगी और धर्मक्षेत्र में जगत में उनकी नामना होगी । सारी दुनिया इसके चरणो में झूकेगी और शीर नमायेगी । विश्व में युगों तक उसका नाम अमर हो जाएगा ।’’
उस समय के समय-संजोग को ध्यान में रखते हुए श्री सवाराम साहबने वो जन्म कुंडली रखी नहीं थी । अब वो समय दिखाई दे रहा है ।