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दर्शनीय स्थान परिचय

पीपलीधाम के पवित्र एवं दर्शनीय स्थलों का संक्षिप्त परिचय।

राजमार्ग पर प्रवेशद्वार

राजमार्ग पर प्रवेशद्वार

पीपलीधाम मालवण चौराहे से ७ किलोमीटर दूर स्थित है। मालवण से ध्रांगध्रा राजमार्ग पर अखियाणा गाँव से ३ किलोमीटर भीतर की ओर स्थित है। यहाँ राजमार्ग के पास भक्तराज श्री वासुदेव महाराज के करकमलों से कलात्मक विशाल प्रवेशद्वार बना है। इसी प्रवेशद्वार से होकर पीपलीधाम में प्रवेश होता है। इस प्रवेशद्वार पर हनुमानजी महाराज और दो हाथियों की मूर्तियाँ ध्यान आकर्षित करती हैं। राजमार्ग से यहाँ के बावन गज के देवालय के दर्शन होते हैं।

जगह का प्रवेशद्वार

जगह का प्रवेशद्वार

विक्रम संवत २०४१ के भादरवा सुद ५ के दिन (ई.स. १९८५) 'श्री रामदेव पीर मंदिर - श्री सवा भगत की जगह' के इस मुख्य प्रवेशद्वार का निर्माण सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज के करकमलों से हुआ। इस प्रवेशद्वार की बाहरी ओर तलवार और ढाल लिए दो द्वारपाल दिखाई देते हैं। इस मुख्य प्रवेशद्वार पर यहाँ की तीन धाराओं के प्रतीक स्वरूप लाल, हरे और सफेद रंग का तिरंगा ध्वज लहरा रहा है। यह प्रवेशद्वार चौबीसों घंटे खुला रहता है।

श्री द्वारकाधीश रामदेव पीर मंदिर

श्री द्वारकाधीश रामदेव पीर मंदिर

विक्रम संवत १९७२ में वैशाख सुद ११ के दिन ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु श्री सवाराम साहेब के करकमलों से बने श्री द्वारकाधीश रामदेवपीर मंदिर की ओसरी में द्वारकाधीश के दर्शन होते हैं। मूर्ति में राधा-कृष्ण विराजमान हैं। इस मंदिर में शक्ति और श्री रामदेवजी महाराज को ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु श्री सवाराम साहेब के करकमलों से गेबी स्थान दिए गए हैं।

ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु श्री सवाराम साहेब की फूल समाधि

ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु श्री सवाराम साहेब की फूल समाधि

यहाँ तीन संयुक्त समाधियों के दर्शन होते हैं। संयुक्त समाधि में बीच में ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु श्री सवाराम साहेब, उनकी दाहिनी ओर श्री झबुबाई और बाईं ओर श्री जमनामा की समाधि है। श्री झबुबाई वि.सं. १९९८ के अधिक आषाढ़ वद अमावस्या के दिन, श्री जमनामा वि.सं. २००४ के भादरवा सुद ११ के दिन और श्री सवाराम साहेब वि.सं. २०१७ के वैशाख वद ११ को बुधवार के दिन सतलोक सिधारे। साथ ही सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज की समाधि के भी दर्शन होते हैं। वे अपनी अवतारी कार्यवाही सफल कर वि.सं. २०५९ के मागशर सुद १३ को मंगलवार दि. १७-१२-२००२ के दिन अपने पार्थिव देह का त्याग कर सतलोक सिधारे। उनकी यह समाधि भक्तराज श्री वासुदेव महाराज के करकमलों से बनी है।

ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज की फूल समाधि

ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज की फूल समाधि

यहाँ तीन संयुक्त समाधियों के दर्शन होते हैं। संयुक्त समाधि में बीच में ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु श्री सवाराम साहेब, उनकी दाहिनी ओर श्री झबुबाई और बाईं ओर श्री जमनामा की समाधि है। श्री झबुबाई वि.सं. १९९८ के अधिक आषाढ़ वद अमावस्या के दिन, श्री जमनामा वि.सं. २००४ के भादरवा सुद ११ के दिन और श्री सवाराम साहेब वि.सं. २०१७ के वैशाख वद ११ को बुधवार के दिन सतलोक सिधारे। साथ ही सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज की समाधि के भी दर्शन होते हैं। वे अपनी अवतारी कार्यवाही सफल कर वि.सं. २०५९ के मागशर सुद १३ को मंगलवार दि. १७-१२-२००२ के दिन अपने पार्थिव देह का त्याग कर सतलोक सिधारे। उनकी यह समाधि भक्तराज श्री वासुदेव महाराज के करकमलों से बनी है।

पीरगादी और गुरुगादी

पीरगादी और गुरुगादी

श्री द्वारकाधीश रामदेवपीर मंदिर की ओसरी में दो गादियाँ हैं — एक गुरुगादी और दूसरी पीरगादी। सामान्य दिनों में गुरुदेव गुरुगादी पर विराजते हैं और महत्वपूर्ण अवसरों पर पूजन के समय पीरगादी पर विराजते हैं।

विघ्नहर्ता श्री गणपति महाराज

विघ्नहर्ता श्री गणपति महाराज

श्री द्वारकाधीश रामदेवपीर मंदिर की ओसरी में, सभी देवों में जिनकी सेवा सर्वप्रथम होती है और जो ऋद्धि-सिद्धि के दाता हैं, ऐसे उमियासुत सदा आनंदकारी गणपति महाराज के दर्शन होते हैं।

पवनसुत श्री हनुमानजी महाराज

पवनसुत श्री हनुमानजी महाराज

श्री द्वारकाधीश रामदेवपीर मंदिर की ओसरी में अंजनीपुत्र, रामभक्त श्री हनुमानजी महाराज के दर्शन होते हैं।

सत् कबीर साहेब

सत् कबीर साहेब

काशी के लहरतारा सरोवर में कमल पुष्प पर प्रकट हुए कबीर साहेब कचोलिया गाँव में हंसदास स्वरूप में पधारकर श्री सवाराम बापा को साहेब घर का अमूल्य भेद — अमर भेद — ज्ञान द्वारा प्रदान कर उन्हें साहेब का स्वरूप बनाया। वि.सं. १९६८ में यह घटना घटी। उन कबीर साहेब का स्थान यहाँ श्री द्वारकाधीश रामदेवपीर मंदिर की ओसरी में ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु श्री सवाराम साहेब की समाधि के ठीक सामने स्थित है।

पीराणा का स्तंभ

पीराणा का स्तंभ

वि.सं. १९७२ में श्री द्वारकाधीश रामदेवपीर मंदिर की ओसरी में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के अवसर पर मंदिर के ईशान कोण में पीराणा के स्तंभ का रोपण कर ऊपर हरा निशान फहराया गया है। इसकी स्थापना ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु श्री सवाराम साहेब के करकमलों से हुई है।

श्री सद्गुरु सवाराम आश्रम

श्री सद्गुरु सवाराम आश्रम

श्री द्वारकाधीश रामदेवपीर मंदिर की ओसरी के सामने 'श्री सद्गुरु सवाराम आश्रम' स्थित है। इस आश्रम में ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु श्री सवाराम साहेब के चित्र को स्थान दिया गया है। वह स्थान गेबी पुरुष का है।

वीर तथा साखिया

वीर तथा साखिया

सत्य सनातन धर्म में गत की गोवाणी (रक्षा) करने वाले वीर को यहाँ प्रांगण में एक छोटे स्तंभ पर घुड़सवार के रूप में स्थान दिया गया है। सत्य सनातन धर्म में गत की गोवाणी करने वाले साखिया को यहाँ प्रांगण में एक छोटे स्तंभ पर स्वस्तिक के प्रतीक द्वारा स्थान दिया गया है।

श्री नकलंक भगवान

श्री नकलंक भगवान

सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज द्वारा विक्रम संवत २०४६ के भादरवा सुद ९ को बुधवार दि. २९-८-१९९० के दिन यहाँ श्री नकलंक आश्रम का निर्माण हुआ। इस आश्रम में सवा दस फुट ऊँचे देवालय में श्री नकलंक भगवान का स्थान है, जिसमें श्री नकलंक भगवान के घोड़े की स्थापना की गई है, जिसका मुख उत्तर दिशा में है। तत्पश्चात भक्तराज श्री वासुदेव महाराज ने इस आश्रम का विस्तार कर उसे अत्यंत सुंदर और सुविधायुक्त बनाया है।

श्री शेषनारायण भगवान

श्री शेषनारायण भगवान

श्री रामदेवपीर पीठ के विशाल प्रांगण में श्री शेषनारायण भगवान का मंदिर स्थित है। ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु श्री सवाराम साहेब का उनके साथ निकट का नाता था, और वे समय-समय पर यहाँ पधारकर सबको दर्शन भी देते हैं। संतों के मतानुसार वे अपने मस्तक पर पृथ्वी को धारण कर भार झेल रहे हैं। यह मंदिर सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज द्वारा बना है। इसमें तीन नागदेव के दर्शन होते हैं।

साहेब का स्तंभ

साहेब का स्तंभ

श्री रामदेवपीर पीठ के विशाल प्रांगण में धर्म की सफेद ध्वजा वाले साहेब के स्तंभ की स्थापना हुई है, जिसे गुरुवाई पद का स्तंभ (धर्मस्तंभ) भी कहा जाता है। श्री सवाराम साहेब को हंसदास साहेब का मिलन हुआ था। सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज द्वारा भक्तों के जयजयकार के बीच वि.सं. २०४४ के भादरवा सुद २ को मंगलवार दि. १३-९-१९८८ के दिन इस धर्मस्तंभ की स्थापना हुई है।

सिंह - शक्ति का स्थान

सिंह - शक्ति का स्थान

श्री रामदेवजी महाराज के बावन गज के देवालय में विराजित श्री रामदेवजी महाराज की दिव्य चेतना से परिपूर्ण तेजस्वी मूर्ति के ठीक सामने शक्ति के स्थान के रूप में सिंह की मूर्ति की स्थापना की गई है। यह स्थापना सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज द्वारा की गई है।

आद्यशक्ति का स्तंभ

आद्यशक्ति का स्तंभ

आद्यशक्ति श्री वेराईमा के देवालय के सम्मुख स्थित आद्यशक्ति के स्तंभ पर निशान के रूप में लाल ध्वजा फहरा रही है। इस स्तंभ की स्थापना विक्रम संवत २०५१ के फागण सुद १५ को शुक्रवार दि. १७-३-१९९५ के दिन सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज के करकमलों से की गई है। ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु श्री सवाराम साहेब और सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज का आद्यशक्ति के साथ निकट का नाता है।

बावा बालनाथ का धूणा

बावा बालनाथ का धूणा

पोकरणगढ़ में भैरवा राक्षस को भूगर्भ में बंद करने वाले बाबा रामदेव पीर ने गुरु रूप में बावा बालनाथ को स्वीकार कर गुरुपरंपरा को आगे बढ़ाया। उन गुरु बालनाथ की तेजस्वी, मोहक मुस्कान बिखेरती ध्यानस्थ मूर्ति और अखंड धूणे के यहाँ दर्शन होते हैं।

श्री आद्यशक्ति वेराई माता का देवालय

श्री आद्यशक्ति वेराई माता का देवालय

ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु श्री सवाराम साहेब की कुलदेवी आद्यशक्ति श्री वेराईमा का यह देवालय सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज के करकमलों से बना है। इसका प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव वि.सं. २०५१ वैशाख वद १० को सोमवार दि. २२-५-१९९५ के दिन मनाया गया था। इसमें श्री बहुचर मा के दर्शन होते हैं। श्री वेराईमा के साथ रहने वाली शक्ति तथा कुलदेव को स्थान दिए गए हैं। देवालय पर लाल ध्वजा लहराती है। साथ ही यहाँ श्री खोडियार मा तथा श्री मेलडी मा के भी दर्शन होते हैं।

श्री गणपति महाराज (बावन गज का देवालय)

श्री गणपति महाराज (बावन गज का देवालय)

दूसरे युग में जब सत्य सनातन धर्म की स्थापना हुई, तब रचे गए सवरा मंडप का नेतृत्व राजा हरिश्चंद्र के पास था। उस समय कोटवाल के रूप में गणेशजी थे, जो यहाँ के बावन गज के देवालय में दर्शनीय बने हैं।

श्री गरुड़ भगवान

श्री गरुड़ भगवान

प्रथम युग में जब सत्य सनातन धर्म की स्थापना हुई, तब जो सवरा मंडप रचा गया उसका नेतृत्व प्रह्लादजी के पास था। इस समय कोटवाल के रूप में गरुड़जी थे। उन गरुड़जी के दर्शन यहाँ श्री रामदेवपीर के बावन गज के देवालय के बरामदे में होते हैं।

श्री कालभैरव

श्री कालभैरव

तीसरे युग में जब सत्य सनातन धर्म की स्थापना हुई, तब सवरा मंडप का नेतृत्व राजा युधिष्ठिर के पास था। उस समय कोटवाल के रूप में कालभैरव थे। वे कालभैरव यहाँ के बावन गज के देवालय में मूर्तिमंत हुए हैं। उनका वह स्वरूप दर्शनीय बना है।

श्री हनुमानजी महाराज (बावन गज का देवालय)

श्री हनुमानजी महाराज (बावन गज का देवालय)

चौथे युग में सत्य सनातन धर्म की स्थापना हेतु जब सवरा मंडप रचा गया, तब उसका नेतृत्व राजा बलि के पास था। उस समय कोटवाल के रूप में हनुमानजी महाराज थे। वे हनुमानजी महाराज यहाँ इस देवालय में दर्शनीय बने हैं।

श्री रामदेवजी महाराज का देवालय

श्री रामदेवजी महाराज का देवालय

सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज के करकमलों से निर्मित श्री रामदेवजी महाराज के बावन गज के देवालय का प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव दि. १६-४-१९९८ से १८-४-१९९८ तक धूमधाम से मनाया गया था। देवालय में सिंहासन पर विराजित श्री रामदेवजी महाराज की दाहिनी ओर बहन सगुणा और भानजे गगुभा हैं तथा बाईं ओर चंवर ढुलाते श्री हरजी भाटी और श्री डालीबाई हैं। संपूर्ण देवालय कलात्मक है और उसमें विविध देवी-देवताओं और अन्य मूर्तियों की स्थापना की गई है। दसों अवतारों का यहाँ समन्वय है। श्री रामदेवजी महाराज की सिंहासन पर विराजित मूर्ति की विश्व में सर्वप्रथम स्थापना यहीं हुई है।

श्री आंबलिया हनुमानजी

श्री आंबलिया हनुमानजी

आद्यशक्ति श्री वेराईमा के देवालय के पीछे आंबलिया हनुमानजी का स्थान है। इस जगह पहले एक बड़ी इमली (आंबली) थी। उस इमली के वृक्ष के स्थान पर यहाँ हनुमानजी की मूर्ति प्रतिष्ठित की गई है।

श्री सवाराम साहेब भोजनशाला और श्री रामदेव पीर अन्नक्षेत्र

श्री सवाराम साहेब भोजनशाला और श्री रामदेव पीर अन्नक्षेत्र

रणुजा के राय श्री रामदेवजी महाराज के वचन अनुसार विक्रम संवत १९६९ से अखंड सदाव्रत चालू होने पर सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज के करकमलों से वि.सं. २०५५ में (ई.स. १९९९) बनी विशाल भोजनशाला को 'श्री सवाराम साहेब भोजनशाला' नाम दिया गया। तत्पश्चात बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए भक्तराज श्री वासुदेव महाराज ने वि.सं. २०७१ के वैशाख वद ११ के दिन 'श्री रामदेव पीर अन्नक्षेत्र' नामक सुविधायुक्त नई भोजनशाला का निर्माण कर विस्तार किया।

भैरव गुफा

भैरव गुफा

पोकरणगढ़ की प्रजा को त्रास देने वाले भैरवा को श्री रामदेवजी महाराज ने भूगर्भ में बंद कर दिया था। उन भैरवनाथ की सवा तेरह फुट गहरी गुफा यहाँ सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज द्वारा रची गई है। उस रंग-बिरंगी गुफा पर काली ध्वजा का निशान फहराता है। इस गुफा में भैरव की मूर्ति की स्थापना वि.सं. २०५६ के वैशाख वद ९ को शनिवार दि. २७-५-२००० के दिन सुबह ११:१५ बजे की गई है।

सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज आश्रम

सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज आश्रम

भक्तराज श्री वासुदेव महाराज द्वारा निर्मित इस आश्रम के विशाल प्रवेशद्वार के टावर में चार दिशाओं की चार घड़ियाँ हैं। यह आश्रम बनने से पहले यहाँ 'संत श्री सवा भगत' फिल्म की शूटिंग हुई थी। सुंदर फूलों के वृक्षों से उद्यान जैसा रमणीय लगने वाला यह आश्रम पीपलीधाम की सुंदरता का उत्कृष्ट नमूना है।

श्री गुरुदेव महामंत्र स्मृति मंदिर

श्री गुरुदेव महामंत्र स्मृति मंदिर

सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज का यह मंदिर भक्तराज श्री वासुदेव महाराज के करकमलों से राजस्थान के बंसीपाल पत्थरों से निर्मित हुआ है। वि.सं. २०७० के मागशर सुद १३ को रविवार दि. १५-१२-२०१३ के दिन इसका प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव मनाया गया था। इस समय पुष्पवर्षा की गई थी। 'गुरुदेव' नाम महामंत्र पत्रिकाओं की स्मृति में इस मंदिर को उपरोक्त नाम दिया गया है। यह मंदिर 'सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज आश्रम' में स्थित है।

श्री हनुमानजी महाराज (बलदेवदास महाराज आश्रम)

श्री हनुमानजी महाराज (बलदेवदास महाराज आश्रम)

सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज आश्रम में भक्तराज श्री वासुदेव महाराज के करकमलों से बने देवालय में श्री हनुमानजी महाराज के दर्शन होते हैं। मंदिर के पीछे दूर 'सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज भुवन' दृष्टिगोचर होता है।

श्री रामदेवजी महाराज का विसामा

श्री रामदेवजी महाराज का विसामा

वि.सं. १९७४ में ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु श्री सवाराम साहेब रासमंडल लेकर बजाणा गाँव जा रहे थे, तब इस जगह अचानक पालकी में से श्रीफल नीचे गिरकर फूट गया। यहाँ ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु श्री सवाराम साहेब ने श्रीफल रखकर श्री रामदेवजी महाराज की स्थापना की। तभी से यह स्थान 'श्री रामदेव पीर का विसामा' कहलाता है। तत्पश्चात वि.सं. २०५६ में सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज के करकमलों से यहाँ घुड़सवार श्री रामदेवजी महाराज की मूर्ति वाला देवालय बना है। यहाँ ओसरी में समीप रहने वाले दो संत पुरुषों को उनकी इच्छा से स्थान दिए गए हैं। इसी जगह सती श्री झबुबाई ने वि.सं. १९९८ में प्रथम बार देहत्याग किया था।

श्री बलदेवदास महाराज गौशाला

श्री बलदेवदास महाराज गौशाला

सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज के करकमलों से श्री रामदेव पीर के विसामे में गौशाला का निर्माण हुआ है। सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज के देहविलय के बाद उनके ज्येष्ठ पुत्र-शिष्य भक्तराज श्री वासुदेव महाराज ने इस गौशाला का नए रूप-रंग के साथ विस्तार कर आधुनिक सुविधाएँ प्रदान कीं। इस गौशाला को 'श्री बलदेवदास महाराज गौशाला' यह अविस्मरणीय नाम दिया गया और इस स्थान की शोभा में अभिवृद्धि की।

रामा सरोवर

रामा सरोवर

श्री रामदेव पीर के विसामे के स्थान पर सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज द्वारा रामा सरोवर का प्रारंभिक निर्माण हुआ। तत्पश्चात भक्तराज श्री वासुदेव महाराज द्वारा इस सरोवर का कायाकल्प होने से यह अत्यंत सुंदर और मोहक बन गया। पोरबंदर के पत्थरों से मढ़े इस सरोवर में प्रवेश के लिए कलात्मक प्रवेशद्वार बनाया गया है। चारों ओर सुंदर हरियाली है। यहाँ प्रवेशद्वार के पास देरी में नागदेव को स्थान दिया गया है।

श्री बलदेवदास महाराज आश्रम (बजाणा)

श्री बलदेवदास महाराज आश्रम (बजाणा)

यह आश्रम बजाणा गाँव में स्थित है। झबुबाई बजाणा की थीं। सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज ने इस जगह पानी की आवश्यकता पूरी करने के लिए बोरवेल बनवाया था और यहाँ से नौ किलोमीटर दूर पीपलीधाम पाइपलाइन द्वारा पानी पहुँचता था। इस आश्रम में पीपलीधाम मंदिर के चित्र स्थापित हैं और श्री हनुमानजी महाराज का छोटा मंदिर स्थित है।

शिवालय

शिवालय

सद्गुरु श्री बलदेवदास महाराज द्वारा श्री रामदेव पीर के विसामे में इस शिवालय का निर्माण हुआ है। रुद्रयाग-यज्ञ द्वारा इसका प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव वि.सं. २०५६ के जेठ वद ११ को शनिवार के दिन संतों-महंतों की उपस्थिति में हर्षोल्लास से मनाया गया था। तत्पश्चात भक्तराज श्री वासुदेव महाराज ने इसका विशेष निर्माण कार्य कर, सुविधाओं से सुसज्जित कर इसे मनोहर रूप दिया। इस शिवालय के लिए खुदाई करते समय नींव में से कलश, पोठिया (नंदी) और थाला निकले थे, जो इस जगह का प्राचीन महत्व दर्शाते हैं। बजाणा जंत्री में इसका उल्लेख ईश्वरिया महादेव के रूप में किया गया है।